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7 हजार रोज मरते हैं पांच साल से कम उम्र के बच्चे, भारत है सबसे आगे

विश्व में जन्मजात शारिरिक दोष, इन्फेक्शन या पालन-पोषण की कमी से हर साल नवजात शिशु की 5 वर्ष की उम्र पूरी करने से पहले ही मृत्यु हो जाती है।

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर किए गए सर्वे में पता चला है कि बीते साल 2016 में विश्व में नवजात बच्चों की मौत 56 लाख में से 24 प्रतिशत भारत में हुई है।

संयुक्त राष्ट्र एजेंसी (यूएन) की रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में सबसे ज्यादा भारत में नवजात बच्चों की मौत हुई है। दूसरे देश की बात करें तो पाकिस्तान में 10 फीसदी, नाइजीरिया में 9 फीसदी, कांगो लोक तांत्रिक गणराज्य में 4 फीसदी, इथोपिया में 3 फीसदी मासूम नवजात बच्चों की मौत हुई हैं।

आंकड़ा-

देश नवजात शिशु मृत्यु प्रतिशत
भारत 24
पाकिस्तान 10
नाइजीरिया 9
कांगो 4
इंथोपि. 3

बाल मृत्युदर का स्तर और रुझान नाम से यह रिपोर्ट यूनिसेफ, विश्व स्वास्थ्य संगठन और विश्व बैंक औरआर्थिक एवं सामाजिक मामलों के लिए यूएन विभाग ने उजागर की है।

विश्व में पांच साल की आयु पूरी होने से पहले नवजात शिशुओं की मौत का कारण 16 प्रतिशत निमोनिया और 8 प्रतिशत डायरिया है। इसके अलावा 30 फीसदी जन्म के समय आने वाली परेशानियों का कारण है।

पांच वर्ष से कम उम्र में बच्चों की मरने की संख्या 2000 में लगभग 99 लाख की तुलना में 2016 में 56 लाख हो गई है। लेकिन इस वर्ष के दौरान शिशुओं की मृत्यु का अनुपात 41 से बढ़कर 46 पर्सेंट यानि 7000 रोज हो गया है।

स्वास्थ्य से जुड़े ग्रुप यूएन का कहना है कि 2017 से 2030 के बीच जन्म के 28 दिन के अंदर मरने वाले बच्चों की संख्या 6 करोड़ तक पहुंच जाएगी। इन आकड़ों को कम करने के लिए उपाय किए जाने की जरूरत है।

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